खाकी की सुस्ती, जांच में हवाबाजी और 35 दिन बाद भी लकीर पीटती पुलिस!
शिवपुरी। खबर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से है जहां फिजिकल थाना क्षेत्र में इस समय पुलिस महकमे की नाकामी का मामला सामने आया है। 50 लाख रुपये की बंपर चोरी के मामले में जब एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी असली चोरों का सुराग तक नहीं लगा, तो साख बचाने के लिए पुलिस ने वही पुराना और घिसा-पिटा पैंतरा अपनाया एक बेगुनाह युवक को उठाकर थाने में बैठा लिया और उस पर जुर्म कबूलने का दबाव बनाने लगे।
35 दिन से अंधेरे में लाठी भांज रही पुलिस
मामला संजय कॉलोनी में मातादीन चौधरी के सूने मकान का है, जहां 28-29 अगस्त की रात चोरों ने करीब 27 तोला सोना, 3 किलो चांदी और 4 लाख नकद समेटकर 50 लाख से अधिक का हाथ साफ किया था। जब मामला गरमाया तो अग्रवाल समाज ने ज्ञापन दिया, जिस पर पुलिस अधिकारियों ने 8 दिन में खुलासे का हवा-हवाई दावा किया था। लेकिन 8 दिन छोड़िए, 35 दिन बीत गए और पुलिस के पास हाथ मलने के अलावा कोई जवाब नहीं है।
असमर्थता छुपाने के लिए ट्रेनर को बनाया शिकार
जब असली शातिर चोर पुलिस की पकड़ से बाहर रहे, तो फिजिकल थाना पुलिस ने अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए एक आसान रास्ता खोजा। 2 अक्टूबर को पुलिसकर्मी एक फिजिकल ट्रेनर मोनू रजक को उठाकर ले गए। दिलचस्प बात यह है कि मोनू वही युवक है जो खुद पुलिस महकमे में भर्ती होने वाले युवाओं को ग्राउंड ट्रेनिंग देता है और जिसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड तक नहीं है।
फरियादी की शंका का बहाना या टीआई की लीपापोती?
शनिवार को जब मोनू की पत्नी रजनी रजक एसपी ऑफिस पहुंची और पुलिस की थर्ड डिग्री, अवैध हिरासत तथा मारपीट की पोल खोली, तब जाकर इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। अब अपनी साख बचाने के लिए थाना प्रभारी अवनीश सिंह राठौड़ फरियादी की शंका का बहाना बना रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या केवल किसी की शंका के आधार पर किसी निर्दोष को 3-3 दिन तक गायब रखकर प्रताड़ित किया जाएगा? या फिर टीआई साहब अपनी नाकामियों का मटका किसी सीधे-साधे ट्रेनर के सिर फोड़कर केस फाइल बंद करना चाहते हैं?
इनका कहना है
पुलिस ने फरियादी की शंका के आधार पर युवक को उठाया था, पूछताछ कर छोड़ दिया था, टार्चर करने का कोई मामला नही है, पुलिस पूरी सक्रियता से जांच कर रही है बहुत जल्द चोरी का पर्दाफाश होगा।
अभिनाश राठौड़, फिजीकल थाना प्रभारी

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