प्रिंस प्रजापति@भोपाल/शिवपुरी। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के संभागीय कार्यालय ग्वालियर-चंबल में भ्रष्टाचार और वित्तीय धांधली का बड़ा मामला सामने आया है। जिसने पूरे वल्लभ भवन से लेकर लोकायुक्त तक हड़कंप मचा दिया है। जिस अधिकारी को गंभीर लापरवाही के चलते नगरीय प्रशासन विभाग 7 सितंबर 2026 को ही तत्काल प्रभाव से निलंबित कर चुका है, उसके खिलाफ 21 सितंबर 2026 को लोकायुक्त कार्यालय भोपाल, वल्लभ भवन (अपर मुख्य सचिव) और नगरीय प्रशासन आयुक्त के समक्ष 54 पन्नों का शिकायती शपथपत्र प्रस्तुत किया है।
इस नई शिकायत ने पूरे प्रशासनिक अमले के होश उड़ा दिए हैं, क्योंकि शिकायत का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि 7 सितंबर 2026 को नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा आदेश क्रमांक 26637 जारी कर सस्पेंड किए जाने के बाद भी प्रभारी संयुक्त संचालक का वित्तीय गोलमाल और 57 निकायों में अरबों का अवैध भुगतान बैकडेट में बदस्तूर जारी रहा।
निलंबन पुराना, फिर भी नहीं थमा भुगतानों और नियुक्तियों का सिंडिकेट!
राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के शिवपुरी जिलाध्यक्ष और आरटीआई कार्यकर्ता माखन सिंह धाकड़ द्वारा लोकायुक्त भोपाल और वल्लभ भवन (अपर मुख्य सचिव) को सौंपी गई 54 पृष्ठों की शिकायत में प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता, सहायक संचालक रीता कैलाशिया, प्रभारी लेखापाल सुनील लचौरिया और लिपिक सौरभ सिंह कौरव को कटघरे में खड़ा किया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निलंबित अधिकारी के रसूख और विभागीय मिलीभगत के चलते संभाग की 57 नगरपालिकाओं और नगर परिषदों में नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय हेरफेर और भुगतानों की प्रक्रिया चालू रखी गई।
फर्जी प्रभार, अवैध DDO पावर और टैक्स चोरी के आरोपों में घिरे सहायक आयुक्त अमरसत्य गुप्ता
नगर निगम ग्वालियर में पदस्थ सहायक आयुक्त अमरसत्य गुप्ता (मूल पद CMO "ख" श्रेणी, पे-ग्रेड 5400) ने ट्रांसफर नीति 2025 की कण्डिका 51 का उल्लंघन कर 7600 पे-ग्रेड वाले संयुक्त संचालक पद का प्रभार हथियाया। सीहोर, नर्मदापुरम और मुरैना के 3-3 वित्तीय भ्रष्टाचार की जांचें पेंडिंग होने के बावजूद ट्रांसफर नीति 2026 की कण्डिका 41 व 52 का उल्लंघन कर 16 जून 2026 को गुप्ता को प्रभारी संयुक्त संचालक बना दिया गया। गुप्ता ने बिना विधिवत संयुक्त संचालक का प्रभार लिए ही 26 नवंबर 2025 से 15 जून 2026 तक अवैध रूप से DDO पावर का इस्तेमाल किया। चेकर ID के लिए नियुक्त सहायक लेखाधिकारी श्रीमती पूजा महकाली को चार्ज न देकर पसंदीदा कर्मचारियों सुनील लचोरिया व सौरभ सिंह कौरव के जरिए बिना टेंडर जांच के अनाधिकृत भुगतान किए। बिलों से नियमानुसार GST और आयकर (TDS) की कटौती न करके निकायों को चपत लगाई गई।
अनुकंपा-संविदा में फर्जीवाड़ा, आरक्षित पदों पर डाका, बिना टेंडर इमारत ज़मींदोज़ व प्रभार का अवैध खेल
अनुकंपा व संविदा नियुक्ति में भारी फर्जीवाड़ा करते हुए नपा फूप (भिंड) में अनुसूचित जाति के आरक्षित पद पर नितेश भारद्वाज को और दतिया के मृतक कर्मचारी के पुत्र अंश ठाकुर को क्षेत्राधिकार से बाहर ले जाकर इंदरगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति थमा दी गई, वहीं गौरमी नगर परिषद में 31 जुलाई 2026 को रिटायर्ड हुए उपयंत्री सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव को महज 10 दिन बाद (1 सितंबर) नियम विरुद्ध तरीके से फिर से संविदा नियुक्ति दे दी गई।
इसके साथ ही पदोन्नति नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सबलगढ़ में बिना पद खाली हुए राघवेंद्र जादौन को प्रमोट कर भोपाल से आई जांच फाइल दबा दी गई, सबलगढ़ व चाचौड़ा में SC/ST आरक्षित पदों पर सामान्य वर्ग को और स्टे पाए ओबीसी कर्मचारी माखन सिंह मीणा को ST पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि गुना में स्वीकृत पदों से बाहर जाकर फर्जी प्रोमोशन बांटे गए। इतना ही नहीं, प्रशासनिक अराजकता फैलाते हुए सहायक संचालक रीता कैलाशिया ने भितरवार नपा प्रभार के दौरान बिना टेंडर पुराना भवन डिस्मेंटल कराकर शासकीय कोष को भारी चपत लगाई और अनाधिकृत रूप से संयुक्त संचालक की सील से दागी अधिकारियों को NOC व समयमान वेतनमान बांटे, जबकि अमरसत्य गुप्ता ने भी बिना भोपाल अप्रूवल के मनपसंद CMO, लेखापाल व उपयंत्रियों को गैर-कानूनी तरीके से प्रभार बांट डाले।
शिवपुरी नगर पालिका में 89 दिनों के तदर्थ कर्मचारी को नियमित लेखापाल बनाने की काली करतूत
54 पन्नों के शिकायती पुलिंदे में शिवपुरी नगर पालिका परिषद से जुड़ा सबसे सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। 29 दिसंबर 1991 को शिवपुरी विकास प्राधिकरण के आदेशानुसार निम्न श्रेणी लिपिक के पद पर महज 89 दिनों के लिए अस्थाई (तदर्थ) रूप से नियुक्त हुए कर्मचारी राघवेंद्र श्रीवास्तव को नियमित करने के लिए बड़ा खेल रचा गया। प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता और लिपिक सौरभ सिंह कौरव ने नियम विरुद्ध DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) आयोजित कराकर इस तदर्थ कर्मचारी को सीधे (नियमित) लेखापाल बनाने की अनुशंसा का प्रस्ताव शासन को भेज दिया, जो कि गंभीर प्रशासनिक अपराध है।
आखिर 7 सितंबर को क्यों सस्पेंड हुए थे अमरसत्य गुप्ता?
नगर पालिका परिषद भिंड में एक लाख रूपए से कम राशि के निर्माण कार्यों में अनियमित भुगतान कर निकाय को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई थी। प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता को जांच अधिकारी बनाकर 3 महीने में विभागीय जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 5 महीने बीत जाने और कारण बताओ नोटिस जारी होने के बावजूद उन्होंने जांच रिपोर्ट दबाकर रखी। इसके अलावा गुप्ता के पास 6 अन्य विभागीय जांच प्रकरण और 15 लोकायुक्त प्रकरणों के जांच प्रतिवेदन भी अटके पाए गए। साथ ही ग्वालियर हाईकोर्ट खंडपीठ के समक्ष प्रचलित अवमानना याचिकाओं में भी समय पर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया था। इन गंभीर लापरवाहियों को देखते हुए आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा 7 सितंबर को आदेश जारी कर गुप्ता को मध्य प्रदेश नगरपालिका सेवा (कार्यपालन) नियम, 1973 के नियम 36(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर भोपाल संचालनालय अटैच किया गया था।
निलंबन की भनक लगते ही फर्जीवाड़े की हदें पार
बता दें कि जब नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने भिंड निर्माण घोटाले की जांच दबाने, 6 विभागीय जांचें, 15 लोकायुक्त केस व हाईकोर्ट अवमानना मामले पेंडिंग रखने पर गुप्ता को निलंबित किया, तब वे गुना में बैठक ले रहे थे। निलंबन की भनक लगते ही गुप्ता और लिपिक कौरव ने 7 सितंबर की बैकडेटेड तारीख में संभाग की कई नगरपालिकाओं में अवैध प्रोमोशन व समयमान वेतनमान के फर्जी आदेश जारी कर दिए।
अब लोकायुक्त के रडार पर पूरा सिस्टम: SIT और (Bill-by-Bill) जांच
लोकायुक्त पहुंची 54 पन्नों की इस धमाकेदार शिकायत ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ फाइलों को दबाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे अरबों रुपए के भुगतानों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। अब लोकायुक्त की निष्पक्ष जांच और डिजिटल रिकॉर्ड्स की पड़ताल के बाद ही इस पूरे फर्जी खेल की अंतिम सच्चाई सामने आ पाएगी। शिकायत में लोकायुक्त से मांग की है कि 57 निकायों में हुए अरबों के भुगतान का देयकवार (Bill-by-Bill) परीक्षण और SNA स्पर्श पोर्टल के डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। अब देखना होगा कि लोकायुक्त की SIT जांच में इस सिंडिकेट के कौन-कौन से चेहरे बेनकाब होते हैंं।


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