खबर का असर: सस्पेंड होने के बाद भी बांटीं रेवड़ियां, शिवपुरी सहित 57 निकायों के सिंडिकेट पर SIT का पंजा: बैकफुट पर आई अफसरशाही की 15 दिन में नपेगी गर्दन

प्रिंस प्रजापति@शिवपुरी न्यूज एक्सप्रेस। ग्वालियर-चंबल संभाग के नगरीय प्रशासन विभाग में फैले भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के बड़े सिंडिकेट पर शिवपुरी न्यूज एक्सप्रेस की खोजी खबर ने भोपाल तक हड़कंप मचा दिया है। संभाग की 57 नगरपालिकाओं और नगर परिषदों में सस्पेंशन के बाद भी चल रहे फर्जीवाड़े, बैकडेट भुगतानों और नियम विरुद्ध नियुक्तियों के 54 पन्नों के काले कच्चे-चिट्ठे का खुलासा होने के बाद राज्य शासन हरकत में आ गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास मध्य प्रदेश के आयुक्त संकेत भोंडवे ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए आदेश क्रमांक 28713 जारी कर 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति (SIT) का गठन कर दिया है। संचालनालय द्वारा गठित यह विशेष दल 15 दिनों के भीतर बिंदुवार जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के जिलाध्यक्ष एवं आरटीआई कार्यकर्ता माखन सिंह धाकड़ द्वारा लोकायुक्त और संचालनालय में की गई शिकायत पर भोपाल से गाज़ गिरी है। संचालनालय ने जिन 4 मुख्य अधिकारियों को जांच के घेरे में लिया है, उनमें निलंबित प्रभारी संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता, सहायक संचालक श्रीमती रीता कैलाशिया, सहायक वर्ग-3 (लिपिक) सौरभ सिंह कौरव और प्रभारी लेखापाल सुनील लचौरिया शामिल हैं। इन चारों पर निलंबन के बावजूद सांठगांठ कर बैकडेट में फैसले लेने और वित्तीय हेरफेर जारी रखने के गंभीर आरोप हैं।

SNA SPARSH पोर्टल से डाका और अनुकंपा-संविदा में बड़ा फर्जीवाड़ा
भोपाल से पहुंची जांच टीम संभाग की 57 नगर निकायों के रिकॉर्ड्स खंगालेगी। इन अफसरों पर SNA SPARSH पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं के अरबों रुपयों का नियम विरुद्ध आहरण करने और बैकडेट भुगतान जारी रखने का आरोप है। इसके अलावा, अनुकंपा और संविदा भर्तियों में अनुसूचित जाति व जनजाति के आरक्षित पदों पर सामान्य वर्ग के लोगों को बैठाने और सेवानिवृत्त अधिकारियों को बैकडोर से संविदा नियुक्ति देने का गंभीर खेल भी उजागर हुआ है।

बिना पद प्रमोशन और शिवपुरी नपा में 89 दिनों के तदर्थ कर्मचारी पर मेहरबानी
जांच में बिना स्वीकृति, बिना रोस्टर निर्धारण और संचालनालय के अनुमोदन के बिना मनपसंद उपयंत्रियों, लेखापालों व सीएमओ को अवैध रूप से प्रभार बांटने का पर्दाफाश होगा। सबसे सनसनीखेज मामला शिवपुरी नगर पालिका परिषद से जुड़ा सामने आया है, जहाँ वर्ष 1991 में शिवपुरी विकास प्राधिकरण में महज 89 दिनों के लिए तदर्थ अस्थाई लिपिक बने राघवेंद्र श्रीवास्तव को नियम विरुद्ध DPC कराकर सीधे नियमित लेखापाल बनाने का षड्यंत्र रचा गया था।

उप संचालक देवेंद्र व्यास की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय जांच दल गठित
नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा गठित SIT की कमान भोपाल संचालनालय के उप संचालक देवेंद्र कुमार व्यास को सौंपी गई है। इस समिति में सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंध संस्थान भोपाल के वित्तीय प्रबंधक अभिषेक रघुवंशी, ग्वालियर-चंबल संभाग के कार्यपालन यंत्री अभिषेक भदौरिया और सहायक संचालक जबर सिंह कुशवाह को सदस्य बनाया गया है। आयुक्त ने कड़े निर्देश दिए हैं कि यह जांच दल 15 दिवस के भीतर बिंदुवार तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करे।

शिवपुरी न्यूज एक्सप्रेस के खुलासे के बाद बैकफुट पर अफसरशाही
गौरतलब है कि निलंबित अधिकारी अमरसत्य गुप्ता और उनके सिंडिकेट द्वारा 7 सितंबर के निलंबन के बाद भी चलाए जा रहे फर्जीवाड़े और लोकायुक्त में पहुंची 54 पन्नों की शिकायत को शिवपुरी न्यूज एक्सप्रेस ने प्रमुखता से उजागर किया था। खबर छपते ही भोपाल के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई, जिसके सीधे परिणाम स्वरूप आज 29 सितंबर 2026 को आयुक्त ने SIT गठन के लिखित आदेश जारी कर दिए। अब इस सिंडिकेट पर बर्खास्तगी और लोकायुक्त की सीधी FIR की तलवार लटक गई है।

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