शिवपुरी। स्मार्ट सिटी और आधुनिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच शिवपुरी से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। शहर को आधुनिक सीवर सिस्टम देने का सपना 13 साल बाद भी अधूरा है। 67 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पर अब तक 111 करोड़ रुपए से ज्यादा फूंक दिए गए हैं, लेकिन सीवर लाइन चालू होना तो दूर, स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस खुले भ्रष्टाचार और अफसरों की नाकामी पर अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का गुस्सा फूट पड़ा है।
मेरे दादा के दौर की लाइन 100 साल बाद भी चालू, आज के अफसरों ने 113 करोड़ फूंक दिए
मीडिया से बातचीत करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। सिंधिया ने याद दिलाया कि रियासतकाल में उनके दादा श्रीमंत माधव महाराज (प्रथम) के शासनकाल में शिवपुरी में 15 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई गई थी। उस ऐतिहासिक सीवर लाइन का 7 किलोमीटर हिस्सा आज 100 साल बाद भी चालू अवस्था में बेहतरीन काम कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ PHE और नगर पालिका की टीम आधुनिक संसाधनों के बावजूद 113 करोड़ रुपए खर्च करके भी शहर को एक चालू सीवर सिस्टम नहीं दे पाई।
PHE और नगर पालिका से छिनेगी कमान, MPUDC संभालेगा जिम्मा
अधूरे पड़े प्रोजेक्ट, जगह-जगह खोदी गई सड़कों और गंदे पानी के भराव से शिवपुरी की जनता सालों से नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। जनता के आक्रोश और सिंधिया की सख्त नाराजगी के बाद शासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब इस फ्लॉप साबित हुए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी PHE और नगर पालिका से पूरी तरह छीन ली गई है। प्रोजेक्ट को पूरा करने की कमान अब एमपी अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को सौंपी जाएगी। साथ ही लगातार बजट बढ़ाने और काम अटकाए रखने के मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी तैयारी है।
13 साल का रिपोर्ट कार्ड: बजट बढ़ा, काम वही का वही
प्रोजेक्ट की शुरुआत में 67 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन लेट-लतीफी और रिवाइज्ड एस्टीमेट के नाम पर बजट बढ़ाकर 113 करोड़ रुपए कर दिया गया। 13 सालों के लंबे इंतजार में 111 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी कर खर्च की जा चुकी है, फिर भी स्थिति चिंताजनक है। शहर के अधिकांश वार्डों में कनेक्शन अधूरे पड़े हैं और मुख्य लाइनें शुरू ही नहीं हो पाई हैं।

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