पत्रकारों व सरपंचों की बैठक को संबोधित करते हुए राजीव सिंह तोमर ने वित्तीय अधिकारों में कटौती पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, पहले विकास कार्यों के भुगतान का डोंगल सरपंचों के पास रहता था, जिसे अब छीनकर जनपद पंचायत के सीईओ को दे दिया गया है। जब भी किसी काम में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार होता है, तो बड़े अफसरों की जवाबदेही तय करने के बजाय गाज सीधे सरपंचों पर गिरती है और उन्हें धारा 40 का नोटिस थमा दिया जाता है।
कार्यक्रम में पोहरी ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष केशव सिंह यादव (फौजी) ने ग्रामीण विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत बयां की। उन्होंने डिजिटल हाजिरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यावहारिक समस्याओं और नेटवर्क की दिक्कतों के कारण 'खेत सड़क योजना' सहित कई महत्वपूर्ण ग्रामीण कार्य ठप हो रहे हैं। सरपंच संघ ने दो टूक मांग की है कि पंचायतों को उनके वास्तविक अधिकार वापस लौटाए जाएं और ग्राम स्वराज की मूल भावना को बहाल किया जाए।
उल्लेखनीय है कि सरपंचों के अधिकारों की जंग लड़ रही यह ग्राम स्वराज बचाओ अभियान यात्रा 11 सितंबर को दतिया से शुरू हुई थी। विभिन्न जिलों से गुजरती हुई यह यात्रा 30 सितंबर को राजधानी भोपाल पहुंचेगी। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि भोपाल पहुंचकर प्रदेशभर के सरपंच अपनी जायज मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखेंगे और बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

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