फर्जी अंकसूची से चयन तक सवालों के घेरे में पोहरी आंगनवाड़ी भर्ती: भृत्य पर सेटिंग के आरोप, CDPO ड्राईवर के खाते में 50 हजार के लेनदेन का दावा

पोहरी। खबर महिला एवं बाल विकास विभाग पोहरी से है जहां परियोजना में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती में अंकसूची से लेकर नियुक्ति तक सांठगांठ के आरोप लगाते हुए एक आवेदिका ने जनसुनवाई में कलेक्टर के नाम शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी हवाला दिया गया है।

जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता मधुरी आदिवासी का आरोप है कि विभाग में पदस्थ भृत्य दौलत बाथम फर्जी अंकसूची तैयार कराने से लेकर भर्ती में सेटिंग कराने तक की भूमिका निभाता है। शिकायत में दावा किया गया है कि इस संबंध में ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में भी फर्जी अंकसूची के मामले सामने आ चुके हैं और कार्रवाई कुछ कार्यकर्ताओं को हटाने तक सीमित रही। सबसे गंभीर आरोप सीडीपीओ के ड्राइवर बताए जा रहे अरविंद जाटव के खाते से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि सितंबर माह में उनके फोन-पे खाते में 50 हजार रुपये का लेनदेन हुआ।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने 2 जुलाई 2025 को रामपुरा आदिवासी बस्ती में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए आवेदन किया था। प्रारंभिक सूची में वह दूसरे स्थान पर थी। पहले स्थान पर रही अभ्यर्थी के खिलाफ आपत्ति के बाद उसकी अंकसूची फर्जी पाए जाने का शिकायत में उल्लेख किया गया है। इसके बाद शिकायतकर्ता का नाम प्रथम स्थान पर आने का दावा किया गया, लेकिन उसकी अंकसूची पर स्कूल की सील और प्राचार्य के हस्ताक्षर नहीं होने के आधार पर उसे अमान्य कर दिया गया। आरोप है कि उसकी अंकसूची के सत्यापन की बात कहकर उसे लगातार टाला गया और बाद में तीसरे क्रम की अभ्यर्थी का चयन कर दिया गया। यही नहीं, शिकायत में परियोजना कार्यालय में उसके पति के साथ कथित अभद्र व्यवहार और मोबाइल छीनने के प्रयास के भी आरोप लगाए गए हैं।

आखिर जांच से क्यों बच रहा मामला?
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि विभाग में फर्जी अंकसूची को लेकर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है, तो पोहरी परियोजना में कार्यरत अन्य कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के दस्तावेजों की व्यापक जांच क्यों नहीं कराई गई? शिकायत में जुलाई माह में आठ कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं पर कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। अब पूरा मामला कलेक्टर की जनसुनवाई तक पहुंच चुका है। शिकायतकर्ता ने फर्जी अंकसूची, चयन प्रक्रिया, कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और 50 हजार रुपये के लेनदेन की जांच स्वतंत्र स्तर से कराने की मांग की है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन शिकायत ने महिला बाल विकास विभाग की भर्ती प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

ड्राईवर तो प्राईवेट है, जांच कराएंगे.... 
मामले में सीडीपीओ नीरज गुर्जर का कहना है कि हम इस पूरे मामले को दिखावा लेते है जांच करवाकर उचित कार्यवाही करेंगें। बहीं, जिला कार्यक्रम अधिकारी धीरेन्द्र जादौन का कहना है कि मामला संज्ञान में लाया गया है ड्राइवर तो प्राइवेट है ओर मामले की जांच करवाकर उचित कार्यवाही करेंगें।

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