शिवपुरी। सहकारिता से समृद्धि का नारा बुलंद करने वाली प्रदेश सरकार के दावों की हवा शिवपुरी जिले में निकलती दिख रही है। गबन और पेंडिंग वसूली के चलते कंगाली की हालत में पहुंचे जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शिवपुरी को संजीवनी मिलने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की पहल पर सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा भरी सभा से की गई 50 करोड़ रुपए की घोषणा के 24 दिन बीत जाने के बाद भी राहत राशि बैंक के खाते में नहीं पहुंच सकी है। कागजों में सिमटी इस मदद की वजह से अब किसानों के खाद-बीज और बैंक की उधारी पर संकट मंडराने लगा है।
बता दे कि बैंक की माली हालत सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने 143 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की पहल की थी। इसके तहत पहली किश्त (50 करोड़ रुपये) मार्च 2025 में जारी की गई थी। दूसरी किश्त मार्च 2026 में जारी होनी थी। 3 सितंबर को ग्वालियर के मंच से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस राशि को जारी करने की मांग रखी, जिस पर सीएम ने तुरंत घोषणा भी कर दी। लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि 50 करोड़ की यह फाइल फिलहाल भोपाल में वित्त विभाग के चक्कर काट रही है।
खाद की नई उधारी बनी जी का जंजाल: मार्कफेड का 23.54 करोड़ बकाया
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक जिले की 86 सोसायटियों के माध्यम से किसानों को खाद और कैश लोन उपलब्ध कराता है। स्थिति यह है कि बैंक पर मार्कफेड (राज्य सहकारी विपणन संघ) का 9.68 करोड़ रुपए का पुराना कर्ज पहले से बकाया है। आगामी रबी सीजन के लिए बैंक ने मार्कफेड से 13.86 करोड़ रुपए का नया खाद उधार ले लिया है, जिसे 1 अक्टूबर तक चुकाना है। कुल मिलाकर बैंक पर केवल खाद का ही 23.54 करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका है और इसे चुकाने के लिए बैंक की तिजोरी खाली है।
12 महीने की छूट ने बिगाड़ा लेन-देन का गणित
बैंक अधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा किसानों को ब्याज मुक्त लोन (0% ब्याज) की राशि लौटाने के लिए 12 महीने की समय सीमा दिए जाने से वसूली प्रभावित हुई है। पहले हर 6 महीने में राशि जमा होती थी, जिससे बैंक का रोटेशन बना रहता था। इसके अलावा कर्जमाफी की अफवाहों और घोषणाओं के कारण बड़ी संख्या में किसान डिफॉल्टर हो गए। वर्तमान में जिले के 86 बी-पैक्स में 86 हजार किसान जुड़े हैं, जिनमें से 63 हजार नियमित लेन-देन कर रहे हैं। इस साल 4 हजार 765 नए किसान भी जुड़े हैं।
कलेक्ट्रेट में लगी सहायक प्रबंधकों की क्लास
बैंक में गबन, फर्जी लोन और नगद खाद वितरण को लेकर दर्ज हुई दो एफआईआर के बाद प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर शनिवार को कलेक्ट्रेट में सभी 86 समितियों के सहायक प्रबंधकों की डेढ़ घंटे तक समीक्षा बैठक ली गई। प्रभारी उपायुक्त प्रत्याशा रघुवंशी ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि वसूली की रफ्तार बढ़ाई जाए और रिकवरी की राशि तुरंत बैंक खातों में जमा हो। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
मार्कफेड से 13.86 करोड़ का खाद लिया है, जिसे 1 अक्टूबर तक लौटाना है। पिछला 9.68 करोड़ भी बकाया है। राज्य स्तर पर 50 करोड़ की दूसरी किश्त की मांग भेजी जा चुकी है। यह राशि मिलते ही बैंक की स्थिति सुधर जाएगी और लेन-देन सुचारू रूप से चलने लगेगा।
आर.एस. भदौरिया, महाप्रबंधक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शिवपुरी
बैंक को सोसायटियों के लिए 13.86 करोड़ का खाद उधार दिया गया है। पुराना 9.68 करोड़ भी पेंडिंग है। पिछले साल मिली पहली किश्त में से बैंक ने 10 करोड़ रुपए लौटाए थे। इस बार भी दूसरी किश्त मिलने पर ही उधारी चुकता होने की उम्मीद है।
शिशिर सिन्हा, डीएमओ, मार्कफेड शिवपुरी

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