जानकारी के अनुसार, 3-4 अक्टूबर की दरमियानी रात एसडीओपी पिछोर प्रमोद शाक्य अपने हमराह पुलिस बल के साथ इलाके में रात्री गश्त पर निकले थे। जब उनका वाहन पिछोर से मायापुर रोड की ओर बढ़ रहा था, तभी सड़क किनारे एक व्यक्ति खून से लथपथ पड़ा दिखाई दिया। ऐसा लग रहा था कि चंद मिनट पहले ही कोई अज्ञात वाहन उसे टक्कर मारकर फरार हो गया था। रात का सन्नाटा होने के कारण वहां कोई अन्य राहगीर भी मौजूद नहीं था।
घायल को बेसुध अवस्था में देखकर एसडीओपी प्रमोद शाक्य ने तुरंत गाड़ी रुकवाई और पुलिसकर्मियों के साथ दौड़कर उसके पास पहुंचे। जब उसकी सांसें चलती दिखीं तो पुलिस टीम ने उसे सहारा देकर उठाया। होश में आते ही उसने अपना नाम जयराम पाल बताया। हालत नाजुक देखते हुए एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय एसडीओपी ने जयराम को तत्काल अपनी ही गाड़ी में बैठाया और सीधे पिछोर अस्पताल के लिए रवाना हो गए।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने जयराम का आपातकालीन उपचार शुरू कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि यदि थोड़ी देर और हो जाती तो अत्यधिक खून बहने से स्थिति गंभीर हो सकती थी। इलाज शुरू कराने के बाद पुलिस ने तत्काल जयराम के परिजनों से संपर्क किया और उन्हें घटना व अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी। रात के अंधेरे में दिखाई गई इस तत्परता और संवेदनशीलता के लिए स्थानीय लोग और घायल के परिजन एसडीओपी प्रमोद शाक्य और उनकी गश्ती टीम की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

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