प्रिंस प्रजापति@शिवपुरी। खबर जिले के पिछोर थाना क्षेत्र से है, जहां एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 1 अक्टूबर की रात पुलिस ने नीले रंग की बलेनो कार (यूपी16बीके0079) से 27 पेटी अवैध देशी शराब जब्त करने का दावा किया है। पुलिस भले ही इस कार्रवाई को अपनी बड़ी उपलब्धि मानकर पीठ थपथपा रही हो, लेकिन जिस नाटकीय अंदाज में पूरा घटनाक्रम हुआ, उसने तारीफ के बजाए पुलिसिया थ्योरी पर ही संदेह के बादल गहरे कर दिए हैं। जनता अब सीधा सवाल दाग रही है कि भारी-भरकम फोर्स की मौजूदगी के बावजूद तस्कर आसानी से कैसे गायब हो गए।
8 जवानों की पूरी फौज, फिर भी तस्कर फरार
पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक, इस पूरी नाकाबंदी और रेड में पिछोर थाना प्रभारी निरीक्षक नीतू सिंह, दो उप निरीक्षक रामकिशोर जोशी, सुबोध टोप्पो, एक सहायक उप निरीक्षक अरविंद सगर और चार आरक्षक धर्मेंद्र लोधी, विकास शिवहरे, योगेंद्र मल्होत्रा, भूपेंद्र सिंह यानी कुल 8 पुलिसकर्मियों का अमला शामिल था। सवाल उठना लाजिमी है कि जब लभेड़ा तिराहा पर पहले से नाकाबंदी थी, पुलिस की गाड़ियां कार के पीछे लगी थीं और आगे मन्टेना कंपनी के पास रास्ता भी पूरी तरह बंद था, तब तस्कर वाहन छोड़कर कैसे रफूचक्कर हो गए? क्या 8 पुलिसवालों की घेराबंदी को चकमा देकर आरोपी सच में अंधेरे में गायब हुए या इस सफलतापूर्वक फरारी के पीछे कोई और ही खेल रचा गया है।
डिजिटल दौर में भी पुलिस के लिए आरोपी अज्ञात
तस्करी में इस्तेमाल की गई नीले रंग की लग्जरी बलेनो कार उत्तर प्रदेश (यूपी16बीके0079) के नंबर पर रजिस्टर्ड है। आज के आधुनिक और डिजिटल दौर में किसी भी वाहन के नंबर से उसके मालिक का नाम, पता और पूरी कुंडली महज दो मिनट में निकाली जा सकती है। इसके बावजूद पुलिस ने केवल अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर ली। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में शराब की सप्लाई कौन कर रहा था और मायापुर से यह खेप कहाँ भेजी जा रही थी। क्या किसी रसूखदार शराब माफिया को बचाने के उद्देश्य से सिर्फ कार और शराब की जब्ती दिखाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है?
शराब के असली सप्लायर तक क्यों नहीं पहुंचती जांच?
पिछोर क्षेत्र में अवैध शराब परिवहन के मामलों की पड़ताल करने पर एक पैटर्न सामने आता है। पुलिस ने कई बार शराब की बड़ी खेप और परिवहन में इस्तेमाल वाहन जब्त किए, कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि कुछ आरोपी मौके से फरार हो गए। जनवरी 2025 की कार्रवाई में 77 पेटी शराब के साथ चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन एक आरोपी फरार बताया गया। इसी तरह, 1 अक्टूबर 2026 को 27 पेटी शराब से लदी बलेनो कार बरामद हुई, जबकि चालक अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला।
इन कार्रवाइयों से यह सवाल उठता है कि जांच शराब और वाहन की जब्ती तथा मौके पर मौजूद आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहती है या इसके आगे भी बढ़ती है। क्या पुलिस यह पता लगाती है कि शराब किससे खरीदी गई, किसके निर्देश पर भेजी गई और इसके पीछे कौन-सा सप्लाई नेटवर्क काम कर रहा था? उपलब्ध खबरों में कुछ मामलों में गिरफ्तारियां हुई हैं फिर भी, फरार आरोपियों की भूमिका और शराब के स्रोत तक जांच पहुंचने को लेकर उठते सवालों का स्पष्ट जवाब सार्वजनिक होना जरूरी है।

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