शिवपुरी। शहर की खस्ताहाल व्यवस्थाओं और लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर गुरुवार को कांग्रेस ने तीखे तेवरों के साथ शंखनाद किया। जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष मोहित अग्रवाल ने नगर पालिका और संबंधित एजेंसियों पर तीखे वार किए। 115 करोड़ के बहुचर्चित सीवर प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस ने मांग की कि जनता के खून-पसीने की कमाई बर्बाद करने वाले अफसरों और ठेकेदारों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और उनसे पाई-पाई की वसूली की जाए।प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष मोहित अग्रवाल ने कहा कि 115 करोड़ का बजट खर्च होने के बाद भी शिवपुरी की सीवर समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। सीवर लाइन डालने के लिए पूरे शहर की सड़कें खोद दी गईं, लेकिन उनका न तो समय पर डामरीकरण हुआ और न ही पैचवर्क। घटिया निर्माण के कारण सड़कें लगातार धंस रही हैं, जिससे शहरवासी आए दिन जानलेवा हादसों का शिकार हो रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने याद दिलाया कि हाल ही में खुद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस सीवर प्रोजेक्ट की लेटलतीफी और अव्यवस्थाओं पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस ने मांग उठाई कि जब सत्तापक्ष के शीर्ष नेता खुद प्रोजेक्ट में गड़बड़ी मान रहे हैं, तो फिर जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज कर वसूली की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? पीआईसी में पास टेंडरों को निरस्त कर भ्रष्ट एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग भी दोहराई गई।
करोड़ों की सिंध पेयजल परियोजना के बावजूद शहर के कई वार्डों में गहराए पेयजल संकट पर कांग्रेस ने नगर पालिका प्रशासन को घेरा। मुख्य पाइपलाइनों में भारी लीकेज के कारण हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है, लेकिन मरम्मत को लेकर प्रशासन पूरी तरह सुस्त है। इसके अलावा पाइपलाइन में अवैध कनेक्शनों और पानी खींचने के लिए लगाए गए टिल्लू पंपों पर नपा की चुप्पी मिलीभगत की ओर इशारा करती है। टेल-एंड (अंतिम छोर) के वार्डों में पानी का दबाव इतना कम रहता है कि नागरिकों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
शहर की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि कई वार्डों में हफ्तों तक कचरा वाहन नहीं पहुंचते, जिससे जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। इसके साथ ही शहर से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं हो रहा है और ट्रेंचिंग ग्राउंड महज कचरा फेंकने का अड्डा बनकर रह गया है। आबादी के अनुपात में सफाई कर्मियों की भारी कमी है, वहीं झाड़ू, डस्टबिन और फॉगिंग मशीनों की अनुपलब्धता से मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
नगर पालिका की कांजी हाउस और गोशाला प्रबंधन की विफलता पर कड़े सवाल दागे गए। कोर्ट रोड, झांसी तिराहा, अस्पताल चौराहा और मुख्य बाजारों में आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे रोजाना एक्सीडेंट हो रहे हैं। बाजारों में बढ़ते अस्थायी अतिक्रमण को हटाने में नगर पालिका की ढीली नीति से पैदल चलना भी दूभर हो गया है। मुख्य मार्गों के अलावा अंदरूनी वार्डों की स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं, जिससे रात के समय सुरक्षा का खतरा मंडराता रहता है। पार्कों के रखरखाव, हरियाली और बच्चों के झूलों की बदहाली पर ध्यान न देकर नगर पालिका सिर्फ कागजी रख-रखाव कर रही है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्तों को जारी करने में पात्र हितग्राहियों को लेटलतीफी और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ रहा है। नामांतरण, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और भवन निर्माण अनुमति जैसे मामूली कामों के लिए लोगों को नपा के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही अवैध ठेका वसूली और प्रशासनिक ढिलाई से व्यापारी और आम जनता दोनों त्रस्त हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नगर पालिका की नेता प्रतिपक्ष शशि शर्मा और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नगर पालिका परिषद की बैठकों में विपक्ष लगातार जनहित के मुद्दे उठाता है, लेकिन सत्ता पक्ष और प्रशासनिक अधिकारी बहुमत के दम पर हमारे सुझावों को दबा देते हैं। शहर विकास के प्रस्ताव केवल फाइलों तक सीमित हैं। अगर सीवर, पेयजल और नपा भ्रष्टाचार के जिम्मेदारों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस उग्र जनआंदोलन करेगी।
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