शिवपुरी। खबर कलेक्ट्रेट कार्यालय से है जहां जिले की ग्राम पंचायत इंदार में शासकीय नियमों को ठेंगा दिखाकर चलाई जा रही शराब दुकान को लेकर ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया। हायर सेकेंडरी स्कूल, प्रसिद्ध लालमाई माता मंदिर और आदिवासी बस्ती के महज 100 मीटर के घेरे में संचालित शराब, मांस और अंडे की दुकानों से परेशान आदिवासी महिलाएं और ग्रामीण सीधे कलेक्टर की चौखट पर पहुंच गए।
मामले की संवेदनशीलता और ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए संयुक्त कलेक्टर मोहम्मद यूनिस कुरैशी ने जरा भी देर नहीं की। उन्होंने जनसुनवाई में मौजूद ग्रामीणों के सामने ही कोलारस एसडीएम और आबकारी अधिकारी को फोन मिलाया और पूरे मामले में तत्काल वैधानिक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए।
बच्चियों से छेड़खानी और पढ़ाई में व्यवधान
संयुक्त कलेक्टर को सौंपे आवेदन में आदिवासी महिलाओं ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि शराब दुकान और अहाते के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। स्कूल जाने वाली नाबालिग बच्चियों को आए दिन छींटाकशी और छेड़खानी का शिकार होना पड़ता है। शराब पीकर आपस में गाली-गलौज और मारपीट करने वालों का शोर सीधे स्कूल के कमरों तक पहुंचता है, जिससे बच्चों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लग पाता। इतना ही नहीं, पास की बस्ती के छोटे-छोटे बच्चे भी इस दूषित माहौल के कारण नशे की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं।
15 दिन का वादा कर मुकर गए थे एसडीएम
ग्रामीणों ने बताया कि समस्या से तंग आकर 11 सितंबर 2026 को आदिवासी महिलाओं ने शराब दुकान के सामने उग्र धरना-प्रदर्शन किया था। तब मौके पर पहुंचे कोलारस अनुविभागीय अधिकारी शिवदयाल धाकड़ ने महिलाओं से लिखित ज्ञापन लेकर 15 दिनों के भीतर शराब दुकान को शिफ्ट कराने का पक्का भरोसा दिया था। हालांकि, 15 दिन बीत जाने के बाद भी जब प्रशासनिक अमले ने एक कदम नहीं बढ़ाया, तो मजबूरन ग्रामीणों को कलेक्ट्रेट कार्यालय का रुख करना पड़ा।
ग्रामवासियों ने संयुक्त कलेक्टर के समक्ष प्रमुखता से दो मांगें रखी हैं जिनमे शराब व मांस दुकानों का स्थानांतरण: स्कूल, मंदिर और रिहायशी क्षेत्र से 100 मीटर की तय दूरी के बाहर दुकान को भेजा जाए। ग्राम इंदार स्थित शासकीय सर्वे नंबर 1559, 1560 और 1562 (मुक्तिधाम की भूमि) पर किए गए अवैध कब्जे को तुरंत हटाया जाए।
संयुक्त कलेक्टर द्वारा सार्वजनिक रूप से एसडीएम और आबकारी अधिकारी को फोन पर दिए गए कड़े निर्देशों के बाद अब ग्रामीणों को उम्मीद जगी है। हालांकि, महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी कागजी खानापूर्ति हुई, तो पूरा गांव चक्काजाम और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

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